देहरादून। उत्तराखंड राज्य गठन की रजत जयंती समारोह के तहत आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करने देहरादून पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य को ‘देवभूमि’ और ‘वीर भूमि’ बताते हुए इसकी अध्यात्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा की भावना को नमन किया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में उत्तराखंड को भगवान शिव-पार्वती की तपोस्थली बताते हुए गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं में राष्ट्रीय सेवा का जज्बा और महिलाओं की भूमिका इस देवभूमि की पहचान है। राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब तक 500 से अधिक जनहितैषी कानून बनाए जा चुके हैं। राष्ट्रपति ने राज्य आंदोलन की नेत्री सुशीला बलोनी, विश्नी देवी शाह, हिमालय विजेता बछेंद्री पाल, चिपको आंदोलन की गौरा देवी और एशियन गेम्स में स्वर्णिम प्रदर्शन करने वाली हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया का नाम लेते हुए नारी वंदन अधिनियम से जोड़ा। विधानसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष ऋतु खंडूरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी जताई और भविष्य में और प्रभावी भूमिका की उम्मीद व्यक्त की।
राष्ट्रपति ने राज्य सरकार द्वारा लागू समान नागरिक संहिता (UCC), भू-कानून और लोकायुक्त गठन जैसे कदमों की प्रशंसा की। गढ़वाल-कुमाऊं रेजीमेंट की वीरता का जिक्र करते हुए जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान सहित कई नाम गिनाए। उन्होंने उत्तराखंड की राष्ट्रभक्ति को अद्वितीय बताया। विशेष सत्र के बाद राष्ट्रपति नैनीताल रवाना हो गईं, जहां वह विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। कल वह कैंची धाम भी जाएंगी। विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री, विधायक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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